Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

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देश के लोकतांत्रिक विकास में शिक्षक की भूमिका

Author(s) डॉ. दिनेश कुमार मीना
Country India
Abstract वैश्विक स्तर पर भारत प्रमुख लोकतांत्रिक देश है जहां नागरिकों की जागरूकता एवं सक्रिय भागीदारी लोकतंत्र की सफलता की कुंजी है। लोकतंत्र के आधार स्तंभ को मजबूत करने में शिक्षक की भूमिका अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है क्योंकि शिक्षक न केवल ज्ञान का संवाहक होता है अपितु नैतिक मूल्यों, सामाजिक-सामुदायिक उत्तरदायित्व और नागरिक चेतना के संवर्धक भी होते हैं। लोकतांत्रिक समाज में शिक्षक विद्यार्थियों को समानता, स्वतंत्रता, न्याय और बंधुत्व जैसे लोकतांत्रिक मूल्यों की शिक्षा देकर उन्हें जिम्मेदार नागरिक बनने के लिए तैयार करते हैं।
प्रस्तुत शोध-पत्र देश के लोकतांत्रिक विकास में शिक्षक की बहुआयामी भूमिका का विश्लेषण करता है। इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि शिक्षा प्रणाली और शिक्षक लोकतांत्रिक व्यवस्था को सुदृढ बनाने में केंद्रीय भूमिका निभाते हैं। शिक्षक न केवल ज्ञान प्रदान करते हैं बल्कि विद्यार्थियों में नेतृत्व, सहिष्णुता, सहयोग, संवाद और सहभागिता जैसे गुणों का विकास करते हैं, जो लोकतंत्र की आत्मा है।
अध्ययन का निष्कर्ष यह है कि शिक्षक लोकतांत्रिक मूल्यों के संवाहक बनकर विद्यार्थियों में नैतिक मूल्यों, कर्तव्यों और अधिकारों के प्रति जागरूकता उत्पन्न करते हैं जिससे राष्ट्र कि लोकतांत्रिक व्यवस्था और अधिक सशक्त बनती है। इस प्रकार शिक्षक को लोकतांत्रिक विकास का वास्तविक निर्माता और समाज परिवर्तन का वाहक कहा जा सकता है।
Keywords शिक्षक, लोकतंत्र, नागरिक चेतना, मूल्य शिक्षा, लोकतांत्रिक विकास।
Field Arts
Published In Volume 15, Issue 2, July-December 2024
Published On 2024-12-13

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