Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

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आधुनिक हिंदी कविता में सामाजिक चेतना

Author(s) नगेन्द्र सिंह
Country India
Abstract यह शोध-पत्र “आधुनिक हिंदी कविता में सामाजिक चेतना” विषय के अंतर्गत आधुनिक कालीन हिंदी कविता में व्यक्त सामाजिक सरोकारों, यथार्थबोध और परिवर्तनशील दृष्टि का विश्लेषण प्रस्तुत करता है। आधुनिक हिंदी कविता ने केवल भावनात्मक अभिव्यक्ति तक सीमित न रहकर समाज की वास्तविक समस्याओं, विसंगतियों और मानवीय मूल्यों के संकट को गहनता से अभिव्यक्त किया है। इस अध्ययन में यह स्पष्ट किया गया है कि किस प्रकार आधुनिक कवियों ने सामाजिक असमानता, शोषण, स्त्री उत्पीडन, दलित चेतना, वर्ग-संघर्ष, राजनीतिक भ्रष्टाचार, शहरीकरण, विस्थापन तथा नैतिक पतन जैसे विषयों को अपनी कविता का केंद्र बनाया। शोध में आधुनिकता और सामाजिक यथार्थ के परस्पर संबंध को रेखांकित करते हुए प्रगतिवाद, नई कविता, जनवादी कविता, स्त्रीवादी और दलित काव्यधाराओं के माध्यम से सामाजिक चेतना की अभिव्यक्ति का विश्लेषण किया गया है। साथ ही, नागार्जुन, धूमिल, केदारनाथ अग्रवाल, रघुवीर सहाय, सर्वेश्वर दयाल सक्सेना, आलोक धन्वा आदि समकालीन कवियों की रचनाओं के उदाहरणों द्वारा यह दर्शाया गया है कि आधुनिक हिंदी कविता समाज के वंचित वर्गों की आवाज बनकर उभरी है।
यह शोध निष्कर्ष देता है कि आधुनिक हिंदी कविता समाज का दर्पण होने के साथ-साथ सामाजिक जागरूकता और परिवर्तन की प्रेरक शक्ति भी है। यह कविता पाठकों में संवेदनशीलता, उत्तरदायित्व और प्रगतिशील सोच को विकसित करती है, जिससे सामाजिक चेतना सुदृढ होती है।
Keywords .
Field Arts
Published In Volume 16, Issue 2, July-December 2025
Published On 2025-07-04

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