Journal of Advances in Developmental Research
E-ISSN: 0976-4844
•
Impact Factor: 9.71
A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal
Plagiarism is checked by the leading plagiarism checker
Call for Paper
Volume 17 Issue 1
2026
Indexing Partners
अटल बिहारी वाजपेई के शासनकाल में जनकल्याणकारी योजनाओं पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन का प्रभाव: एक समालोचनात्मक अध्ययन
| Author(s) | डॉ. राकेश कुमार जायसवाल |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | भारतीय राजनीति में विचारधारा और नीति-निर्माण के बीच संबंध हमेशा से महत्वपूर्ण रहा है। विशेष रूप से उन राजनीतिक धाराओं में, जो अपने वैचारिक स्रोतों को भारतीय दार्शनिक परंपरा, सांस्कृतिक चेतना और सामाजिक वास्तविकताओं से ग्रहण करती हैं, नीति का मूल्यांकन केवल प्रशासनिक दक्षता के आधार पर नहीं किया जा सकता; उसके पीछे निहित दृष्टिकोण और मानवीय उद्देश्य भी समान रूप से महत्वपूर्ण होते हैं। भारतीय जनसंघ और बाद में भारतीय जनता पार्टी की वैचारिक दिशा में पंडित दीनदयाल उपाध्याय के “एकात्म मानववाद” का केंद्रीय स्थान है। यह दर्शन न केवल पश्चिमी पूंजीवाद और मार्क्सवादी समाजवाद दोनों के प्रति एक वैकल्पिक भारतीय दृष्टि प्रस्तुत करता है, बल्कि विकास, समाज, व्यक्ति, राज्य और राष्ट्र के संबंधों की एक समग्र व्याख्या भी देता है। अटल बिहारी वाजपेई के नेतृत्व में 1998 से 2004 तक की सरकार भारतीय राजनीति के इतिहास में ऐसे कालखंड के रूप में देखी जाती है, जब उदारीकरणोत्तर भारत में विकास की प्रक्रिया को बुनियादी ढांचे, मानव संसाधन, ग्रामीण संपर्क, खाद्य सुरक्षा और सामाजिक अवसरों के विस्तार के साथ जोड़ा गया। यद्यपि वाजपेयी सरकार गठबंधन राजनीति की सीमाओं के भीतर कार्य कर रही थी, फिर भी उसके अनेक नीति-निर्णयों और जनकल्याणकारी कार्यक्रमों में एकात्म मानववाद के तत्व स्पष्ट रूप से दिखाई देते हैं। प्रधानमंत्री ग्राम सड़क योजना, सर्व शिक्षा अभियान, स्वर्णिम चतुर्भुज परियोजना, अंत्योदय अन्न योजना और राष्ट्रीय कृषि नीति जैसी पहलों में केवल आर्थिक विस्तार का लक्ष्य नहीं था, बल्कि विकास को समाज के अंतिम व्यक्ति तक पहुँचाने, क्षेत्रीय असमानताओं को कम करने, ग्रामीण भारत को विकास की मुख्यधारा से जोड़ने और मानव-केंद्रित नीति-चिंतन को संस्थागत रूप देने का प्रयास भी था। प्रस्तुत शोधपत्र का उद्देश्य यह विश्लेषण करना है कि वाजपेयी शासनकाल की प्रमुख जनकल्याणकारी योजनाएँ किस प्रकार पंडित दीनदयाल उपाध्याय के एकात्म मानववाद से प्रेरित थीं। यह अध्ययन इस निष्कर्ष की ओर संकेत करता है कि वाजपेयी सरकार की नीतियाँ शुद्ध अर्थों में वैचारिक पुनरावृत्ति नहीं थीं, बल्कि उन्होंने एकात्म मानववाद के प्रमुख सिद्धांतों—समग्र विकास, अंत्योदय, विकेंद्रीकरण, स्वदेशी तथा मानव की गरिमा—को समकालीन शासन और विकास की भाषा में रूपांतरित करने का प्रयास किया। हालांकि इन योजनाओं के क्रियान्वयन में अनेक व्यावहारिक सीमाएँ और विरोधाभास भी रहे, फिर भी समग्र रूप से यह कहा जा सकता है कि वाजपेयी शासनकाल भारतीय राजनीतिक विचार और सार्वजनिक नीति के बीच एक महत्वपूर्ण सेतु का उदाहरण प्रस्तुत करता है। |
| Keywords | अटल बिहारी वाजपेई, दीनदयाल उपाध्याय, एकात्म मानववाद, अंत्योदय, जनकल्याणकारी योजनाएँ, ग्रामीण विकास, समग्र विकास, विकेंद्रीकरण |
| Published In | Volume 10, Issue 1, January-June 2019 |
| Published On | 2019-05-07 |
| Cite This | अटल बिहारी वाजपेई के शासनकाल में जनकल्याणकारी योजनाओं पर पंडित दीनदयाल उपाध्याय के दर्शन का प्रभाव: एक समालोचनात्मक अध्ययन - डॉ. राकेश कुमार जायसवाल - IJAIDR Volume 10, Issue 1, January-June 2019. DOI 10.71097/IJAIDR.v10.i1.1832 |
| DOI | https://doi.org/10.71097/IJAIDR.v10.i1.1832 |
| Short DOI | https://doi.org/hbwt89 |
Share this

CrossRef DOI is assigned to each research paper published in our journal.
IJAIDR DOI prefix is
10.71097/IJAIDR
Downloads
All research papers published on this website are licensed under Creative Commons Attribution-ShareAlike 4.0 International License, and all rights belong to their respective authors/researchers.