Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

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पसमांदा समाज में नेतृत्व का संकट बिहार के विशेष संदर्भ में

Author(s) बीबी सफीना
Country India
Abstract बिहार के सामाजिक एवं राजनीतिक परिदृश्य में पसमांदा समाज एक महत्वपूर्ण जनसमूह के रूप में उपस्थित है, किंतु इसके बावजूद यह समुदाय लंबे समय से नेतृत्व के संकट का सामना कर रहा है। पसमांदा शब्द उन सामाजिक रूप से पिछड़े, दलित एवं वंचित मुस्लिम समुदायों के लिए प्रयुक्त होता है, जिन्हें मुख्यधारा की मुस्लिम राजनीति और सामाजिक संरचना में अपेक्षित प्रतिनिधित्व प्राप्त नहीं हो सका। यह शोध-पत्र बिहार के विशेष संदर्भ में पसमांदा समाज के नेतृत्व संकट का विश्लेषण करता है तथा इसके ऐतिहासिक, सामाजिक, आर्थिक एवं राजनीतिक कारणों की पड़ताल करता है। अध्ययन का मुख्य उद्देश्य यह है कि बिहार जैसे राज्य में, जहाँ सामाजिक न्याय और पिछड़ा वर्ग राजनीति का लंबा इतिहास रहा है, वहाँ भी पसमांदा समाज प्रभावी नेतृत्व विकसित करने में क्यों असफल रहा। शोध में यह पाया गया कि मुस्लिम समाज के भीतर व्याप्त अशराफ, अजलाफ, अरज़ल जैसी सामाजिक स्तरीकरण व्यवस्था ने पसमांदा समुदाय को हाशिये पर बनाए रखा। राजनीतिक दलों ने भी पसमांदा मुसलमानों को केवल वोट बैंक के रूप में उपयोग किया, जबकि नेतृत्व के अवसर सीमित वर्गों तक ही केंद्रित रहे। इसके अतिरिक्त शिक्षा, आर्थिक पिछड़ापन, सामाजिक जागरूकता की कमी तथा संगठनात्मक दुर्बलता ने नेतृत्व निर्माण की प्रक्रिया को प्रभावित किया है। यह अध्ययन गुणात्मक शोध पद्धति पर आधारित है, जिसमें विभिन्न पुस्तकों, शोध-पत्रों, सरकारी रिपोर्टों एवं समकालीन राजनीतिक विमर्श का विश्लेषण किया गया है। शोध में बिहार के विभिन्न जिलों में पसमांदा समाज की राजनीतिक भागीदारी, सामाजिक स्थिति एवं नेतृत्व क्षमता का तुलनात्मक अध्ययन भी शामिल है। साथ ही, अली अनवर जैसे पसमांदा आंदोलन से जुड़े नेताओं की भूमिका का मूल्यांकन किया गया है, जिन्होंने पसमांदा विमर्श को राष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने का प्रयास किया।
पसमांदा समाज में नेतृत्व का संकट केवल राजनीतिक प्रतिनिधित्व का प्रश्न नहीं है, बल्कि यह सामाजिक न्याय, समान अवसर एवं पहचान के संघर्ष से भी जुड़ा हुआ है। यदि शिक्षा, सामाजिक चेतना, राजनीतिक प्रशिक्षण एवं आर्थिक सशक्तिकरण पर विशेष ध्यान दिया जाए, तो पसमांदा समाज में प्रभावी और जनाधारित नेतृत्व का विकास संभव है। यह शोध बिहार में पसमांदा समाज की वास्तविक स्थिति को समझने तथा समावेशी लोकतंत्र की दिशा में आवश्यक नीतिगत सुझाव प्रस्तुत करने का प्रयास करता है।
Keywords जातिगत विभाजन, नेतृत्व संकट, सामाजिक चेतना, राजनीतिक प्रशिक्षण एवं आर्थिक सशक्तिकरण इत्यादि
Published In Volume 15, Issue 2, July-December 2024
Published On 2024-07-06
Cite This पसमांदा समाज में नेतृत्व का संकट बिहार के विशेष संदर्भ में - बीबी सफीना - IJAIDR Volume 15, Issue 2, July-December 2024.

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