Journal of Advances in Developmental Research
E-ISSN: 0976-4844
•
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Volume 17 Issue 1
2026
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कोडमदेसर और अन्य ग्रामीण देवालयों का अध्ययन: लोक-धार्मिक पर्यटन की संभावनाएँ
| Author(s) | नरेंद्र सिंह राणावत, राजेश स्वामी |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | प्रस्तुत शोध पत्र राजस्थान के बीकानेर अंचल में स्थित कोडमदेसर भैरव मंदिर को केंद्र में रखते हुए तोलियासर भेरू जी मंदिर (श्रीडूंगरगढ़ के समीप), बजरंग धोरा हनुमान जी मंदिर (बीकानेर), गुसाइसर स्थित गुसाईं जी का धाम (बीकानेर–जयपुर मार्ग पर 33 किमी दूरी पर) तथा सुजानदेसर स्थित माँ काली एवं बाबा रामदेव मंदिर जैसे प्रमुख ग्रामीण देवालयों के धार्मिक, सांस्कृतिक और पर्यटनात्मक आयामों का समग्र अध्ययन प्रस्तुत करता है। यह अध्ययन इन लोकदेवताओं एवं ग्राम्य देवालयों से जुड़ी जन-आस्थाओं, अनुष्ठानों, लोकमान्यताओं, मेलों एवं परंपराओं का विश्लेषण करते हुए इनके सामाजिक प्रभाव और सांस्कृतिक निरंतरता में योगदान को रेखांकित करता है। शोध यह स्पष्ट करता है कि ये देवालय केवल पूजा-अर्चना तक सीमित नहीं हैं, बल्कि ग्रामीण जीवन की सामाजिक संरचना, सांस्कृतिक चेतना और सामुदायिक एकता के केंद्र बिंदु भी हैं। गुसाईं जी का धाम तथा सुजानदेसर के माँ काली और बाबा रामदेव मंदिर जैसे स्थल लोकदेवता परंपरा, शौर्य, शक्ति, भक्ति और जनकल्याण की लोक अवधारणाओं के सशक्त प्रतीक हैं। इन देवालयों से जुड़े वार्षिक मेले, यात्राएँ और अनुष्ठान लोककला, लोकसंगीत, लोकनाट्य और पारंपरिक शिल्प को भी जीवंत बनाए रखते हैं। अध्ययन में यह भी प्रतिपादित किया गया है कि इन ग्रामीण धार्मिक स्थलों में लोक-धार्मिक पर्यटन की व्यापक संभावनाएँ निहित हैं। यदि इन मंदिरों को सुव्यवस्थित पर्यटन अवसंरचना, प्रचार-प्रसार और सांस्कृतिक मार्गों से जोड़ा जाए, तो यह क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था, रोजगार सृजन और ग्रामीण विकास को नई गति दे सकते हैं। साथ ही, यह सतत पर्यटन विकास के आदर्श मॉडल के रूप में उभर सकता है, जो सांस्कृतिक संरक्षण और आर्थिक सशक्तिकरण—दोनों को संतुलित रूप से साधता है। इस प्रकार, यह अध्ययन बीकानेर अंचल के ग्रामीण देवालयों को लोकधार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और पर्यटन विकास के त्रिकोणीय संदर्भ में स्थापित करता है। |
| Keywords | लोक-देवालय, कोडमदेसर, ग्रामीण धार्मिक स्थल, लोक-आस्था, सांस्कृतिक विरासत, पर्यटन विकास, सामुदायिक सहभागिता, ग्रामीण संस्कृति संरक्षण |
| Published In | Volume 16, Issue 1, January-June 2025 |
| Published On | 2025-01-03 |
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