Journal of Advances in Developmental Research
E-ISSN: 0976-4844
•
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Volume 17 Issue 2
2026
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आदिवासी अस्मिता और राजनीतिक चेतना भील जनजाति के विशेष संदर्भ में एक विश्लेषणात्मक अध्ययन (राजस्थान के संदर्भ में)
| Author(s) | मुकेश कुमार चाहर, डॉ. इन्द्राज मल यादव |
|---|---|
| Country | India |
| Abstract | प्रस्तुत शोध-आलेख आदिवासी अस्मिता और राजनीतिक चेतना के अंतर्संबंध का विश्लेषण भारत की सबसे बड़ी जनजाति “भील” के संदर्भ में, विशेष रूप से राजस्थान के दक्षिणी वागड़ अंचल को केंद्र में रखकर करता है। अध्ययन यह दर्शाता है कि भीलों की राजनीतिक चेतना कोई अचानक उभरी परिघटना नहीं, बल्कि उपनिवेशकालीन शोषण, भूमि एवं वन-अधिकारों से बेदखली, तथा सांस्कृतिक अस्मिता के क्षरण के विरुद्ध चली आ रही दीर्घकालिक प्रतिरोध-परंपरा का समकालीन विस्तार है। मानगढ़ (1913) से लेकर भारत आदिवासी पार्टी के उदय (2023) तक की यात्रा को रेखांकित करते हुए यह आलेख यह तर्क प्रस्तुत करता है कि अस्मिता और राजनीति भीलों के लिए परस्पर पृथक क्षेत्र नहीं, बल्कि एक ही सातत्य के दो छोर हैं, जहाँ 'आदिवासी' पहचान स्वयं एक राजनीतिक दावा बन जाती है। |
| Keywords | आदिवासी अस्मिता, राजनीतिक चेतना, भील जनजाति, वागड़, भील प्रदेश, भारत आदिवासी पार्टी, मानगढ़, पाँचवीं अनुसूची, वन अधिकार। |
| Field | Arts |
| Published In | Volume 17, Issue 2, July-December 2026 |
| Published On | 2026-07-18 |
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