Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

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जयशंकर प्रसाद के काव्य में राष्ट्रीय चेतना

Author(s) अशोक कुमार धाकड़
Country India
Abstract आधुनिक हिंदी साहित्य में जयशंकर प्रसाद का स्थान अत्यंत गौरवपूर्ण है। वे छायावाद के प्रमुख स्तंभ होने के साथ-साथ भारतीय सांस्कृतिक चेतना, राष्ट्रीय स्वाभिमान और मानवीय मूल्यों के समर्थ कवि भी हैं। उनके काव्य में राष्ट्रीय चेतना केवल राजनीतिक स्वतंत्रता की आकांक्षा तक सीमित नहीं है, बल्कि वह भारतीय संस्कृति, इतिहास, आध्यात्मिक परंपरा, मानवीय एकता तथा राष्ट्रीय गौरव के समन्वित स्वरूप के रूप में अभिव्यक्त होती है। प्रसाद ने अपने काव्य के माध्यम से भारतीय जनमानस में आत्मगौरव, स्वाधीनता, सांस्कृतिक अस्मिता और त्याग की भावना का संचार किया। उनकी कविताएँ अतीत की गौरवपूर्ण स्मृतियों को वर्तमान से जोड़ते हुए भविष्य के लिए प्रेरणा प्रदान करती हैं। प्रस्तुत शोध-पत्र में जयशंकर प्रसाद के काव्य में निहित राष्ट्रीय चेतना का ऐतिहासिक, सांस्कृतिक, सामाजिक तथा साहित्यिक दृष्टि से विश्लेषण किया गया है।
Keywords जयशंकर प्रसाद, राष्ट्रीय चेतना, छायावाद, भारतीय संस्कृति, स्वाधीनता, राष्ट्रवाद।
Field Arts
Published In Volume 17, Issue 2, July-December 2026
Published On 2026-07-26

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