Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

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स्थानीय स्वशासन में महिलाओं की भूमिका: जालोर जिले के विशेष संदर्भ में

Author(s) नारायण सिंह
Country India
Abstract सारांश (Abstract)
राजस्थान के ग्रामीण परिदृश्य में स्थानीय स्वशासन लोकतांत्रिक विकेंद्रीकरण की सबसे महत्वपूर्ण प्रक्रिया है। पंचायती राज संस्थाओं ने गाँव-स्तर पर शासन को जनता के निकट पहुँचाया है।स्थानीय स्वशासन—जिसमें पंचायत राज संस्थाएँ (PRIs) तथा नगरीय निकाय दोनों सम्मिलित हैं—लोकतांत्रिक संरचना की सबसे बुनियादी इकाई है। विशेष रूप से राजस्थान ने देश में सबसे पहले महिलाओं को 33% आरक्षण प्रदान करके एक ऐतिहासिक कदम उठाया, जिसे बाद में कई राज्यों ने अपनाया। राजस्थान सरकार की विभिन्न रिपोर्टों तथा सुजस में प्रकाशित आँकड़ों से स्पष्ट है कि महिलाओं की भागीदारी केवल प्रतीकात्मक नहीं रही, बल्कि उन्होंने प्रशासनिक नेतृत्व, निर्णय-निर्धारण, सामाजिक जागरूकता, और विकासात्मक योजनाओं के कार्यान्वयन में महत्वपूर्ण योगदान दिया है।और विशेषकर 73वें व 74वे संविधान संशोधन के बाद महिलाओं के लिए आरक्षण लागू होने से राजनीतिक सशक्तिकरण की नई दिशा बनी है। यह शोध-पत्र विशेष रूप से जालोर जिले पर केंद्रित है, जहाँ सामाजिक संरचनाएँ, शैक्षणिक स्तर, आर्थिक स्थिति और पारंपरिक पितृसत्तात्मक परिवेश महिलाओं की राजनीतिक यात्रा को प्रभावित करते हैं।
पिछले पंचायत चुनावों में महिलाओं की भागीदारी में उल्लेखनीय वृद्धि देखने को मिली है—चाहे वह मतदान प्रतिशत हो, उम्मीदवारों की संख्या हो, या सरपंच एवं वार्ड सदस्य जैसे पदों पर उनकी उपस्थिति। फिर भी सामाजिक मान्यताओं, आर्थिक निर्भरता, सीमित निर्णय-क्षमता, प्रॉक्सी नेतृत्व और शिक्षा की कमी जैसी बाधाओं के बीच उनका वास्तविक नेतृत्व अभी भी परिवर्तन के संक्रमणकाल में है। यह शोध जालोर जिले के सामाजिक-आर्थिक संदर्भ, पंचायत-स्तरीय आंकड़ों, सरकारी रिपोर्टों और केस-स्टडी के आधार पर महिला नेतृत्व के उदय, उसकी चुनौतियों, प्रभावों और संभावनाओं का विश्लेषण करता है।
इसके अलावा, अध्ययन यह भी दर्शाता है कि जालोर जिले में महिला प्रतिनिधि जल-संरक्षण, पोषण, शिक्षा, स्वच्छता और महिला-सुरक्षा जैसे मुद्दों को प्राथमिकता देती हैं। स्थानीय स्तर पर उनके निर्णय-निर्माण से ग्राम विकास योजनाओं में सकारात्मक सुधार दिखाई देते हैं। राजस्थान सरकार के सुजस पोर्टल, पंचायत विभाग के आंकड़े, और जिला रिपोर्टें यह संकेत देती हैं कि महिला प्रतिनिधित्व बढ़ने से शासन अधिक पारदर्शी, जवाबदेह और संवेदनशील हुआ है।
समग्रतः, यह शोध-पत्र सिद्ध करता है कि जालोर जिले में महिलाएं स्थानीय स्वशासन की एक परिवर्तनकारी शक्ति के रूप में उभर रही हैं, बशर्ते उन्हें प्रशिक्षण, आर्थिक स्वतंत्रता, परिवार-समर्थन और संस्थागत सहयोग मिले।
Keywords बीजशब्द -महिला सशक्तिकरण, स्थानीय स्वशासन, जालोर जिला, पंचायती राज व्यवस्था, राजनीतिक सहभागिता, लैंगिक समानता
Field Arts
Published In Volume 16, Issue 2, July-December 2025
Published On 2025-11-23
DOI https://doi.org/10.71097/IJAIDR.v16.i2.1618
Short DOI https://doi.org/hbf77v

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