Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 16 Issue 2 July-December 2025 Submit your research before last 3 days of December to publish your research paper in the issue of July-December.

राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के फैसले लेने की प्रक्रिया में महिला प्रतिनिधि और उनकी भूमिका: एक अनुभवजन्य अध्ययन

Author(s) मीनाक्षी वैष्णव, डॉ. चारू मिश्रा
Country India
Abstract पंचायती राज संस्थाएं गांव के विकास की प्रक्रिया में नींव और साधन का काम करती हैं। लेकिन पुरुष-प्रधान सामाजिक व्यवस्था के कारण, ज़्यादातर फैसले पुरुष सदस्य ही लेते हैं। आरक्षण और ग्राम पंचायत में महिलाओं की सही भागीदारी न होने के बावजूद, ग्राम पंचायत में उनका योगदान बराबर नहीं देखा जाता है। भारत के संविधान में 73वां संशोधन भारत में ग्रामीण समाज के लोकतांत्रिक प्रशासन के इतिहास में एक मील का पत्थर है, जिसने महिलाओं के लिए तीनों स्तरों यानी जिला परिषद, ब्लॉक समिति, सरपंच और ग्राम पंचायतों के पंचों पर पंचायती राज संस्थाओं का प्रतिनिधित्व करने और ग्रामीण समाज के प्रशासन में अपनी नेतृत्व कौशल और विकास की सोच दिखाने का रास्ता खोला है। इसलिए शोधार्थी ने राजस्थान राज्य के सवाईमाधोपुर जिले में ग्राम पंचायत की महिला प्रतिनिधियों की सामाजिक-आर्थिक प्रोफ़ाइल का पता लगाने, ग्राम पंचायत में महिला प्रतिनिधियों की भागीदारी को प्रभावित करने वाले कारणों का अध्ययन करने, ग्राम पंचायत के फैसले लेने की प्रक्रिया में ग्राम पंचायत की महिला प्रतिनिधियों की भूमिका का पता लगाने और ग्राम पंचायत की महिला प्रतिनिधियों के साथ सामाजिक कार्य में हस्तक्षेप का दायरा खोजने की कोशिश की है। शोधार्थी ने अध्ययन में वर्णनात्मक-सह-खोजपूर्ण शोध डिज़ाइन लागू किया है। यह स्टडी गुणात्मक होने के साथ-साथ मात्रात्मक भी होगी। उत्तरदाताओं की संख्या 200 रखी गयी हैं। जवाब देने वालों में ग्राम पंचायत की महिला प्रतिनिधि, उनके परिवार के सदस्य, समुदाय के लोग, CBO के सदस्य और ग्राम पंचायत के साथ काम करने वाले अलग-अलग सरकारी कार्यालय के अधिकारी होंगे। शोधार्थी ने पाया है कि महिलाएं ग्राम पंचायत के ज़रिए ग्रामीण विकास की प्रक्रिया में अपना अच्छा योगदान देना चाहती हैं, लेकिन इसमें पुरुष-प्रधान व्यवस्था और लिंग भेद से जुड़े मुद्दे सबसे बड़ी रुकावटें हैं। शोधार्थी ने पाया कि महिला प्रतिनिधियों की भूमिका को बेहतर बनाने में सामाजिक कार्य का दखल एक अहम भूमिका निभाता है।
Keywords महिला प्रतिनिधि, पंचायती राज संस्थाएँ, निर्णय लेना, स्थानीय स्वशासन, पितृसत्ता, लिंग विभेद
Field Arts
Published In Volume 16, Issue 2, July-December 2025
Published On 2025-11-28
Cite This राजस्थान में पंचायती राज संस्थाओं के फैसले लेने की प्रक्रिया में महिला प्रतिनिधि और उनकी भूमिका: एक अनुभवजन्य अध्ययन - मीनाक्षी वैष्णव, डॉ. चारू मिश्रा - IJAIDR Volume 16, Issue 2, July-December 2025.

Share this