Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

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ग्रामीण अर्थव्यवस्था के सामाजिक-आर्थिक विकास में मिलेट्स का योगदान: कोंडागांव विकासखंड के सन्दर्भ में

Author(s) Dr. Devashish Haldar, Shree. Shainoo Ram Sori
Country India
Abstract मिलेट्स जिन्हें कभी मोटे अनाज कहा जाता था, अब पोषक-अनाज के रूप में वैश्विक स्तर पर पहचाने जाते हैं । संयुक्त राष्ट्र द्वारा वर्ष 2023 को अंतर्राष्ट्रीय मिलेट्स वर्ष घोषित किए जाने के बाद इनकी ख्याति और बढ़ी | यह अध्धयन ग्रामीण अर्थव्यवस्था के विकास में मिलेट्स के योगदान के संबंध जानकारी प्रस्तुत करता है। इसमें पारंपरिक भारतीय व्यंजनों में उनके उपयोग, वैज्ञानिक दृष्टिकोण से उनके पोषण और स्वास्थ्य लाभ तथा आधुनिक खाद्य प्रसंस्करण में नए अनुप्रयोगों की संभावनाओं पर चर्चा की गई है। अध्ययन बताते हैं कि मिलेट्स न केवल पोषण का भंडार हैं,बल्कि मधुमेह और हृदय रोगों जैसी जीवनशैली विकारों के प्रबंधन में भी सहायक हो सकते हैं। पारंपरिक प्रसंस्करण विधियाँ जैसे किण्वन और अंकुरण, इनके पोषक तत्वों की उपलब्धता को बढ़ाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाती हैं। प्रस्तुत अध्ययन का उद्देश्य कोंडागांव जिले के ग्रामीण क्षेत्र में मिलेट्स आधारित कृषि की स्थिति का विश्लेषण करना तथा उनके रोजगार अवसरों और आय वृद्धि पर पड़ने वाले प्रभाव का मूल्यांकन करना है। अध्ययन के लिए उपलब्ध द्वितीयक स्रोतों तथा क्षेत्रीय आँकड़ों का विश्लेषण किया गया है। अध्ययन से यह स्पष्ट होता है कि मिलेट्स आधारित कृषि, प्रसंस्करण तथा विपणन गतिविधियों के विस्तार से स्थानीय स्तर पर रोजगार और स्व-रोजगार के अवसरों में वृद्धि हुई है। इसके अतिरिक्त महिला स्व-सहायता समूहों तथा लघु उद्यमों के माध्यम से मिलेट प्रसंस्करण और मूल्य संवर्धन गतिविधियों को बढ़ावा मिला है, जिससे जनजातीय परिवारों की आय में सकारात्मक परिवर्तन देखा गया है ।
Keywords मिलेट्स, पारंपरिक व्यंजन, पोषण,ग्लाइसेमिक इंडेक्स,किण्वन,खाद्य सुरक्षा
Field Sociology > Economics
Published In Volume 17, Issue 1, January-June 2026
Published On 2026-04-08
DOI https://doi.org/10.71097/IJAIDR.v17.i1.1782
Short DOI https://doi.org/hb4w8r

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