Journal of Advances in Developmental Research

E-ISSN: 0976-4844     Impact Factor: 9.71

A Widely Indexed Open Access Peer Reviewed Multidisciplinary Bi-monthly Scholarly International Journal

Call for Paper Volume 17 Issue 1 January-June 2026 Submit your research before last 3 days of June to publish your research paper in the issue of January-June.

एल्गोरिद्मिक सामाजिक अनुबंध: भारत की प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था में कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व और श्रम-कल्याण का मूल्यांकन

Author(s) Dr. Abdul Rahman
Country India
Abstract भारत की डिजिटल अर्थव्यवस्था में प्लेटफ़ॉर्म-आधारित व्यवसाय मॉडल ने श्रम-संबंधों की संरचना, स्वरूप और वैधता को गहरे स्तर पर प्रभावित किया है। परंपरागत “नियोक्ता-कर्मचारी” संबंध, जिसमें वेतन, अनुशासन, सामाजिक सुरक्षा और संस्थागत उत्तरदायित्व का एक तुलनात्मक रूप से स्थिर विनिमय-संबंध निहित रहता था, अब “एग्रीगेटर-पार्टनर” मॉडल के रूप में पुनर्गठित हो रहा है। भोजन वितरण, कैब-हेलिंग, हाइपरलोकल लॉजिस्टिक्स, घरेलू सेवाओं और ऑन-डिमांड श्रम पर आधारित प्लेटफ़ॉर्म कंपनियाँ स्वयं को तकनीकी मध्यस्थ, बाज़ार-सुगमकर्ता या डिजिटल अवसंरचना-प्रदाता के रूप में प्रस्तुत करती हैं; किंतु व्यवहार में वे डेटा-संचालित निगरानी, प्रदर्शन-आधारित प्रोत्साहन, एल्गोरिद्मिक आवंटन, रेटिंग-नियंत्रण, स्वचालित अनुशासन और कार्य-सुलभता के माध्यम से श्रम-प्रक्रिया पर प्रभावी नियंत्रण स्थापित करती हैं। यह परिवर्तन श्रम-संबंधों की पारंपरिक संविदात्मक धारणाओं को चुनौती देता है और सामाजिक अनुबंध की उस अवधारणा को कमजोर करता है जिसके अंतर्गत स्थायित्व, सुरक्षा और न्यूनतम कल्याण को श्रम के प्रतिफल के रूप में देखा जाता था। यह लेख तर्क देता है कि प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था में दक्षता, विस्तार और उपयोगकर्ता-सुविधा का लाभ प्रायः श्रमिकों की असुरक्षा, आय-अनिश्चितता, दुर्घटना-जोखिम, मानसिक तनाव, स्वास्थ्य-व्यय और सामाजिक सुरक्षा के अभाव की कीमत पर अर्जित किया जाता है। भारतीय विधिक ढाँचा, विशेषकर सामाजिक सुरक्षा संहिता, 2020, प्लेटफ़ॉर्म एवं गिग श्रमिकों की मान्यता की दिशा में महत्वपूर्ण कदम तो है, किंतु यह अभी तक श्रम-संबंधी समतुल्य सुरक्षा और जवाबदेही का पर्याप्त ढाँचा निर्मित नहीं कर पाया है। इसी नियामकीय अंतराल में यह लेख कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व (CSR) को श्रम-कल्याण का एक पूरक, मानकात्मक और संक्रमणकालीन साधन मानने का प्रस्ताव रखता है। लेख “एल्गोरिद्मिक सामाजिक अनुबंध” की संकल्पना विकसित करता है, जिसके अनुसार डेटा-संचालित व्यावसायिक दक्षता का लाभ उठाने वाली कंपनियों पर डेटा-संचालित श्रम-कल्याण का संस्थागत दायित्व भी होना चाहिए। हितधारक सिद्धांत, साझा मूल्य-निर्माण, श्रम-प्रक्रिया सिद्धांत, अस्थिरता (precarity) और उत्तरदायी कॉर्पोरेट शासन के साहित्य के आधार पर यह लेख प्रतिपादित करता है कि कंपनी अधिनियम, 2013 की धारा 135 के अंतर्गत CSR की अनुमेय गतिविधियों में “प्लेटफ़ॉर्म श्रमिक कल्याण” को स्पष्ट रूप से सम्मिलित किया जाना चाहिए। स्वास्थ्य बीमा, दुर्घटना-कवरेज, अपस्किलिंग, मानसिक स्वास्थ्य सहायता, डिजिटल साक्षरता, एल्गोरिद्मिक पारदर्शिता, डेटा-अधिकार और शिकायत-निवारण तंत्र जैसे उपाय CSR व्यय के वैध क्षेत्र बन सकते हैं। लेख निष्कर्ष निकालता है कि प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था की दीर्घकालिक स्थिरता केवल लागत-कुशलता पर नहीं, बल्कि साझा मूल्य-निर्माण और नए सामाजिक अनुबंध के निर्माण पर निर्भर करेगी।
Keywords एल्गोरिद्मिक प्रबंधन, कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व, प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था, गिग श्रम, भारत, श्रम-कल्याण, हितधारक सिद्धांत, सामाजिक सुरक्षा, साझा मूल्य-निर्माण
Published In Volume 7, Issue 2, July-December 2016
Published On 2016-09-08
Cite This एल्गोरिद्मिक सामाजिक अनुबंध: भारत की प्लेटफ़ॉर्म अर्थव्यवस्था में कॉर्पोरेट सामाजिक दायित्व और श्रम-कल्याण का मूल्यांकन - Dr. Abdul Rahman - IJAIDR Volume 7, Issue 2, July-December 2016. DOI 10.71097/IJAIDR.v7.i2.1811
DOI https://doi.org/10.71097/IJAIDR.v7.i2.1811
Short DOI https://doi.org/hbwkws

Share this